दारु मीठी दाख री, सूरां मीठी शिकार ।
सेजां मीठी कामिणी, तो रण मीठी तलवार ।।
दारु पीवो रण चढो, राता राखो नैण ।
बैरी थारा जल मरे, सुख पावे ला सैण ।।
रण खेती रजपूत री,कबहू न पीठ धरेह ।
देश रुखाले आपणे, दुखिया पीड़ हरे ।।
खाली धङ रि कद हुवे चेहरे बीनापिछाण ।
राजपूता रे बीना क्यारो राजस्थान ।।